भारतीय संविधान भाग III (अनुच्छेद 12-35) में मुख्य रूप से मौलिक अधिकारों (Fundamental Rights) के माध्यम से मूलभूत मानवाधिकारों की गारंटी देता है।
इनमें समानता, स्वतंत्रता, शोषण से सुरक्षा, धर्म की स्वतंत्रता और सांस्कृतिक/शैक्षिक अधिकार शामिल हैं, जो सभी न्यायालय में प्रवर्तनीय (enforceable) हैं। साथ ही, भाग IV के राज्य के नीति निदेशक तत्व और मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 एक मजबूत सुरक्षा घेरा प्रदान करते हैं।
ये सभी नागरिकों को दी गई मुख्य स्वतंत्रताएं हैं, जिन्हें अदालतों द्वारा लागू कराया जा सकता है।
अनुच्छेद 14-18: कानून के समक्ष समानता, भेदभाव का निषेध, और अवसरों की समानता।
अनुच्छेद 19-22: भाषण, सभा, निवास की स्वतंत्रता, और जीवन व व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार।
अनुच्छेद 23-24: बलात श्रम, मानव तस्करी और बाल श्रम का पूर्ण निषेध।
अनुच्छेद 25-28: अंतरात्मा की स्वतंत्रता, धर्म को मानने और प्रचार करने का अधिकार।
अनुच्छेद 29-30: अल्पसंख्यकों की संस्कृति संरक्षण और शिक्षण संस्थान स्थापित करने का अधिकार।
अनुच्छेद 32: अधिकारों को लागू कराने के लिए सर्वोच्च न्यायालय जाने का अधिकार।
(भाग IV - गैर-न्यायोचित लक्ष्य)
"संविधान मूलभूत ढांचा प्रदान करता है, जबकि बाद के कानून और न्यायिक व्याख्याएं इन अधिकारों का विस्तार करती हैं और उन्हें लागू करती हैं, जिससे भारत में एक व्यापक मानवाधिकार प्रणाली सुनिश्चित होती है।"
भारत में मानवाधिकारों (जीवन, स्वतंत्रता और गरिमा) के संरक्षक के रूप में NHRC की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह मानवाधिकार उल्लंघनों की जाँच करता है, जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करता है, अधिकारों का प्रचार करता है, नीतिगत सुधारों की सिफारिश करता है और हाशिए पर पड़े वर्गों की आवाज़ बनता है।